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Saturday, March 5, 2016
संधि व उसके प्रकार
1. विसर्ग संधि ।
2. स्वर संधि ।
1. ** स्वर संधि **–
स्वर संधि दो स्वरो के मेल से होने वाली संधि को कहते है ।
1. गुण संधि –
नियम –
किसी शब्द के अ, आ के आगे इ, ई हो तो ए और उ, ऊ हो तो ओ तथा ऋ हो तो अर् हो जाता है , इसे गुण-संधि कहते हैं।
जैसे–
2. दीर्घ संधि –
ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ के बाद यदि ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ आ जाएँ तो दोनों मिलकर दीर्घ आ, ई और ऊ हो जाते हैं।
3. वृद्धि संधि –
नियम –
4. अयादी संधि –
नियम –
5. यण संधि –
नियम –
* उ, ऊ के आगे किसी असमान स्वर के आने पर उ ऊ को ‘व्’ हो जाता है।
2. **व्यंजन सन्धि **–
व्यंजन का व्यंजन से अथवा किसी स्वर से मेल होने पर जो परिवर्तन होता है उसे व्यंजन संधि कहते हैं। दो व्यंजनो के मेल से होने वाली संधि को व्यंजन संधि कहते है ।
विसर्ग के मेल से होने वाली संधि को विसर्ग संधि कहते है । विसर्ग (:) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में जो विकार होता है उसे विसर्ग-संधि कहते हैं।
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